हीरामाय रोग (Hirayama Disease) क्या है?HealthPlanet

Posted on Sat 3rd Dec 2022 : 15:00

Hirayama Disease: हिरयामा रोग एक या दोनों हाथों की कमजोरी के साथ मौजूद तंत्रिका तंत्र की एक दुर्लभ बीमारी है. इस स्थिति को पहली बार 1959 में केइजो हिरयामा द्वारा वर्णित किया गया था. इसे ब्राचियल मोनोमेलिक शोष (एमएमए), डिस्टल अपर ऐक्सटैलिटी के किशोर खंडीय पेशी शोष के रूप में भी जाना जाता है. यह एशिया में विशेष रूप से जापान, भारत, चीन और कुछ दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में अधिक प्रचलित है. भारत में यह आमतौर पर पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना क्षेत्रों में देखी जाती है. यह बीमारी ज्यादातर किशोर और शुरुआती वयस्क आयु वर्ग (15-25 वर्ष) के पुरुषों में देखी जाती है.

इस बीमारी का कारण पूरी तरह से ज्ञात नहीं है. शुरू में यह एक प्रगतिशील अपक्षयी मोटर न्यूरॉन बीमारी मानी जाती थी; हालांकि ऐसा नहीं हो सकता है. आनुवांशिक कारक हो सकते हैं जो रोग के होने की संभावना हो सकते हैं लेकिन इस विकार के साथ किसी विशिष्ट जीन की पहचान नहीं की गई है. ज्यादातर रोगियों में हिरयामा रोग नॉनफैमिल है.

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